Ras In Hindi Grammar Class 10 | ras ke udaharan | रस की परिभाषा रस के प्रकार और स्थायी भाव

दोस्तों हिंदी ग्रामर में रस एक महत्वपूर्ण चैप्टर है और इसके प्रश्न कक्षा 10 और महत्वपूर्ण Government परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं इस पोस्ट में हम रस के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे कि रस की परिभाषा, रस के प्रकार, रस के उदाहरण एवं व्याख्या आदि और यह सब हम जानेंगे Ras in Hindi Grammar पोस्ट में।

रस किसे कहते हैं? रस की परिभाषा what is ras in hindi class 10

‘रस’ का शाब्दिक अर्थ है ‘आनंद’ | काव्य को पढने या सुनने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे ‘रस’ कहा जाता है। आचार्यों ने रस को काव्य की आत्मा कहां है रस को ‘काव्य की आत्मा/ प्राण तत्व’ माना जाता है।

रस के अवयव या अंग :-

रस के चार अवयव या अंग माने गए हैं।

1. स्थायी भाव

2. विभाव

3. अनुभाव

4. संचारी भाव

1.स्थायी भाव :-

स्थायी भाव का मतलब है प्रधान भाव। प्रधान भाव वही हो सकता है जो रस की अवस्था तक पहुँचता है। काव्य या नाटक में एक स्थायी भाव शुरू से आखिर तक होता है। स्थायी भावों की संख्या 9 मानी गई है। स्थायी भाव ही रस का आधार है। एक रस के मूल में एक स्थायी भाव रहता है।

अतएव रसों की संख्या भी 9 हैं, जिन्हें ‘नवरस’ कहा जाता है। मूलतः नवरस ही माने जाते हैं। बाद के आचार्यों ने 2 और भावों (वात्सल्य व भगवद् विषयक रति) को स्थायी भाव की मान्यता दी । इस प्रकार, स्थायी भावों की संख्या 11 तक पहुँच जाती है और तदनुरूप रसों की संख्या भी 11 तक पहुँच जाती है।

2. विभाव :-

स्थायी भावों के उद्बोधक कारण को विभाव कहते हैं। विभाव 2 प्रकार के होते हैं—

1.आलंबन विभाव

2.उद्दीपन विभाव।

आलंबन विभाव :- जिसका आलंबन या सहारा पाकर स्थायी भाव जगते हैं आलंबन विभाव कहलाता है; जैसे नायक-नायिका । आलंबन विभाव के दो पक्ष होते हैं- आश्रयालंबन व विषयालंबन । जिसके मन में भाव जगे वह आश्रयालंबन तथा जिसके प्रति या जिसके कारण मन में भाव जगे वह विषयालंबन कहलाता है।

उदाहरण : यदि राम के मन में सीता के प्रति रति का भाव जगता है तो राम आश्रय होंगे और सीता विषय ।

उद्दीपन विभाव :- जिन वस्तुओं या परिस्थितियों को देखकर स्थायी भाव उद्दीप्त होने लगता है उद्दीपन विभाव कहलाता है; जैसे- चाँदनी, कोकिल कूजन, एकांत स्थल, रमणीक उद्यान, नायक या नायिका की शारीरिक चेष्टाएँ आदि ।

3.अनुभाव :-

मनोगत भाव को व्यक्त करनेवाले शरीर-विकार अनुभाव कहलाते हैं । अनुभावों की संख्या 8 मानी गई है-

1.स्तंभ,

2.स्वेद,

3.रोमांच,

4.स्वर-भंग,

5.कम्प,

6.विवर्णता (रंगहीनता),

7.अश्रु,

8.प्रलय (संज्ञाहीनता/निश्चेष्टता)।

4.संचारी भाव :-

मन में संचरण करनेवाले (आने-जाने वाले) भावों को संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं। संचारी भावों की कुल संख्या 33 मानी गई है-

1.हर्ष,
2.विषाद,
3.त्रास (भय/व्यग्रता),
4.लज्जा (ब्रीड़ा),
5.ग्लानि,
6.चिंता,
7.शंका,
8.असूया (दूसरे के उत्कर्ष के प्रति असहिष्णुता),
9.अमर्ष (विरोधी का अपकार करने की अक्षमता से उत् पन्न दुःख),
18.निर्वेद (अपने को कोसना या धिक्कारना),
19.धृति (इच्छाओं की पूर्ति, चित्त की चंचलता का अभाव),
20.मति,
21.बिबोध (चैतन्य लाभ),
22.वितर्क,
23.श्रम,
24.आलस्य,
25.निद्रा,
10.मोह,
11.गर्व,
12.उत्सुकता,
13.उग्रता,
14.चपलता,
15.दीनता
16.जड़ता,
17.आवेग
26.स्वप्न,
27.स्मृति,
28.मद
29.उन्माद,
30.अवहित्था (हर्ष आदि भावों को छिपाना),
31.अपस्मार (मूच्छी),
32.व्याधि (रोग),
33.मरण।
ras in hindi

रस क प्रकार और स्थायी भाव ras ke prakar with examples in hindi

1. शृंगार रस

2.हास्य रस

3.करुण रस

4.वीर रस

5.रौद्र रस

6.भयानक रस

7.बीभत्स रस

8.अद्भुत रस

9.शांत रस

10.वत्सल रस

11.भक्ति रस

विद्वानों द्वारा 11 रस माने गए हैं आइए जानते हैं उनके बारे में उदाहरण एवं उनके स्थायी भाव के साथ पुरी जानकारी

1. शृंगार रस Shringar Ras in Hindi :- यह दो प्रकार के होते हैैं

स्थायी भाव :- रति/प्रेम

(i) संयोग श्रृंगार ( संभोग श्रृंगार )

उदाहरण –

बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय ।

सौंह करे, भौंहनि हँसै, दैन कहै, नटि जाय। (बिहारी)

(ii) वियोग श्रृंगार ( विप्रलंभ श्रृंगार )

उदाहरण –

निसिदिन बरसत नयन हमारे ।

सदा रहति पावस ऋतु हम पै जब ते स्याम सिधारे ।। (सूरदास)

2.हास्य रस Hasya Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- हास

उदाहरण –

तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेमप्रताप,

साज मिले पंद्रह मिनट, घंटा भर आलाप ।

घंटा भर आलाप, राग में मारा गोता,

धीरे-धीरे खिसक चुके थे सारे श्रोता। (काका हाथरसी)

3. करुण रस Karun Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- शोक

उदाहरण –

सोक बिकल सब रोवहिं रानी।
रूपु सीलु बलु तेजु बखानी ।।
करहिं विलाप अनेक प्रकारा।
परिहिं भूमि तल बारहिं बारा ।। (तुलसीदास)

4. वीर रस Veer Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- उत्साह

उदाहरण –

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो ।
सामने पहाड़ हो कि सिंह की दहाड़ हो ।
तुम कभी रुको नहीं, तुम कभी झुको नहीं ।। (द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी)

5. रौद्र रस Raudra Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- क्रोध

उदाहरण –

श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे।
सब शील अपना भूल कर करतल युगल मलने लगे।।
संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े।
करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठ कर खड़े।। (मैथिलीशरण गुप्त)

6. भयानक रस Bhayanak Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- भय

उदाहरण –

उधर गरजती सिंधु लहरियाँ कुटिल काल के जालों सी।
चली आ रहीं फेन उगलती फन फैलाये व्यालों-सी ।। (जयशंकर प्रसाद)

7. बीभत्स रस Veebhats Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- जुगुत्सा/घृणा

उदाहरण –

सिर पर बैठ्यो काग आँख दोउ खात निकारत ।
खींचत जीभहिं स्यार अतिहि आनंद उर धारत ।।
गीध जांघि को खोदि-खोदि के मांस उपारत ।
स्वान आंगुरिन काटि-काटि के खात विदारत ।। (भारतेन्दु)

8. अद्भुत रस Adbhut Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- विस्मय/आश्चर्य

उदाहरण –

अखिल भुवन चर-अचर सब, हरि मुख में लखि मातु ।
चकित भई गद्गद् वचन, विकसित दृग पुलकातु ।। (सेनापति)

9. शांत रस Shant Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- शम/निर्वेद (वैराग्य/वीतराग)

उदाहरण –

मन रे तन कागद का पुतला।
लागै द बिनसि जाय छिन में, गरब करै क्या इतना ।। (कबीर)

10. वत्सल रस Vatsalya Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- वात्सल्य रति

उदाहरण –

किलकत कान्ह घुटरुवन आवत ।
मनिमय कनक नंद के आंगन बिम्ब पकरिवे घावत ।। (सूरदास)

11. भक्ति रस Bhakti Ras in Hindi :-

स्थायी भाव :- भगवद् विषयक रति/अनुराग

उदाहरण –

राम जपु, राम जपु, राम जपु बावरे ।
घोर भव नीर-निधि, नाम निज नाव रे ।। (तुलसीदास)

नोट :-

  1. शृंगार रस को ‘रसराज/ रसपति’ कहा जाता है।
  2. नाटक में 8 ही रस माने जाते हैं क्योंकि वहां शांत को रस में नहीं गिना जाता । भरत मुनि ने रसों की संख्या 8 माना है।
  3. भरत मुनि ने केवल 8 रसों की चर्चा की है, पर आचार्य अभिननगुप्त (950-1020 ई.) ने ‘नवमोऽपि शान्तो रसः’ कहकर 9 रसों को काव्य में स्वीकार किया है।
  4. शृंगार रस के व्यापक दायरे में वत्सल रस व भक्ति रस आ जाते हैं इसलिए रसों की संख्या 9 ही मानना ज्यादा उपयुक्त है।

रस संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

भरतमुनि (1 ली सदी) को ‘काव्यशास्त्र का प्रथम आचार्य’ माना जाता है।

सर्वप्रथम आचार्य भरत मुनि ने अपने ग्रंथ ‘नाट्य शास्त्र’ में रस का विवेचन किया। उन्हें रस संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है।

भरतमुनि के अनुसार रस के कुछ प्रमुख सूत्र

1.’विभावानुभाव व्यभिचारिसंयोगाद् रस निष्पतिः’—विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी (संचारी) के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
2.’नाना भावोपगमाद् रस निष्पत्तिः । नाना भावोपहिता अपि स्थायिनो भावा रसत्वमाप्नुवन्ति ।’–नाना (अनेक) भावों के उपगम (निकट आने/ मिलने) से रस की निष्पत्ति होतीी है। अनेक भाव सेे युक्त स्थाई भाव रसावस्था को प्राप्त होते है।

3.’विभावानुभाव व्यभिचारि परिवृतः स्थायी भावो रस नाम लभते नरेन्द्रवत्’ ।—विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी से घिरे रहने वाले स्थायी भाव की स्थिति राजा के समान है। दूसरे शब्दों में, विभाव, अनुभाव व व्यभिचारी (संचारी) भाव को परिधीय स्थिति और स्थायी भाव को केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है ।

रस-संप्रदाय के प्रतिष्ठापक आचार्य, मम्मट (11वीं सदी)ने काव्यानंद को ‘ब्रह्मानंद सहोदर’ (ब्रह्मानंद योगी द्वाराअनुभूत आनंद) कहा है। वस्तुतः रस के संबंध में ब्रह्मानंद की कल्पना का मूल स्रोत तैत्तरीय उपनिषद है जिसमें कहा गया है ‘रसो वै सः’- आनंद ही ब्रह्म है।

रस-संप्रदाय के एक अन्य आचार्य, आचार्य विश्वनाथ (14 वीं सदी) ने रस को काव्य की कसौटी माना है। उनका कथन है ‘वाक्य रसात्मकं काव्यम्’–रसात्मक वाक्य ही काव्य है।

हिन्दी में रसवादी आलोचक हैं आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, डॉ० नगेन्द्र आदि । आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने संस्कृत के रसवादी आचार्यों की तरह रस को अलौकिक न मानकर लौकिक माना है और उसकी लौकिक व्याख्या की है। वे रस की स्थिति को ‘हृदय की मुक्तावस्था’ के रूप में मानते हैं। उनके शब्द हैं : ‘लोक-हृदय में व्यक्ति-हृदय के लीन होने की दशा का नाम रस दशा है’।

Ras in Hindi video

अगर आप रस पर वीडियो देखना चाहते हैं इस वीडियो में क्लास की तरह पूरी तरह से समझाया गया है की राशि क्या है रस कितने प्रकार के होते हैं एवं रस के मुख्य तत्व क्या है इसे देखकर आप समझ सकते हैं

रस के प्रश्न उत्तर

Q.1.रस कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर – रसों की कुल संख्या 11 मानी जाती है और यह 11 प्रकार के होते हैं।

Q.2.श्रृंगार रस कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर – श्रृंगार रस दो प्रकार के होते हैं
1. संयोग श्रृंगार (संभोग श्रृंगार)
2. वियोग श्रृंगार ( विप्रलंभ श्रृंगार )

Q.3.रस के कितने अंग होते हैं?

उत्तर – रस के चार अंग माने गए हैं।
१.स्थाई भाव
२.विभाव
३.अनुभाव
४.संचारी/व्यभिचारी भाव

Q.4.विभाव रस के कितने भेद होते हैं?

उत्तर – विभाव रस के दो भेद होते हैं।
१. आलंबन विभाव
२. उद्दीपन विभाव

Q.5.शांत रस स्थायी भाव क्या है?

उत्तर – शम/निर्वेद (वैराग्य/वितराग) होता है।

Q.6.श्रृंगार रस का स्थाई भाव क्या है?

उत्तर – रति/प्रेम होता है।

Q.7.वीर रस का स्थाई भाव क्या है?

उत्तर – वीर रस का स्थाई भाव उत्साह होता है।

Q.8.वीभत्स रस का स्थायी भाव क्या है?

उत्तर – जुगुत्सा/घृणा मुख्य भाव होते हैं।

Q.9.भक्ति रस का स्थायी भाव क्या है?

उत्तर – भगवद् विषयक रति/अनुराग

Q.10.भयानक रस का स्थायी भाव क्या है?

उत्तर – भयानक रस का स्थायी भाव ‘भय’ होता है।

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